उत्तर भारत में श्रावण मास कब से आरंभ हो रहा है
वर्ष 2026 में उत्तर भारत के अनुसार श्रावण (सावन) मास 30 जुलाई, गुरुवार से आरंभ हो रहा है और इसका समापन 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन तथा श्रावण पूर्णिमा के दिन होगा। यह भगवान शिव की भक्ति के लिए समर्पित वर्ष का सबसे पवित्र महीना माना जाता है, और उत्तर भारत के लाखों शिव भक्त इस दिन से अपनी विशेष साधना और व्रत आरंभ करते हैं।
पूर्णिमांत और अमांत कैलेंडर में अंतर
भारत में हिंदू माह की गणना दो अलग-अलग पद्धतियों से की जाती है—पूर्णिमांत और अमांत। पूर्णिमांत पद्धति में माह की समाप्ति पूर्णिमा तिथि पर होती है, और यह पद्धति मुख्य रूप से राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, बिहार तथा झारखंड जैसे उत्तर भारतीय राज्यों में प्रचलित है। इसके विपरीत, अमांत पद्धति में माह की समाप्ति अमावस्या तिथि पर होती है, जो आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गोवा, महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात तथा तमिलनाडु जैसे दक्षिण और पश्चिम भारतीय राज्यों में प्रचलित है।
इसी कारण उत्तर भारत में श्रावण मास दक्षिण-पश्चिम भारत की तुलना में लगभग पंद्रह दिन पहले आरंभ हो जाता है। उत्तर भारतीय पूर्णिमांत कैलेंडर के अनुसार श्रावण मास आषाढ़ पूर्णिमा के अगले दिन से, अर्थात 30 जुलाई से आरंभ होकर श्रावण पूर्णिमा तक चलता है, जबकि अमांत कैलेंडर के अनुसार यह मास इस वर्ष 13 अगस्त से आरंभ होकर 11 सितंबर तक चलेगा। इस अंतर के कारण उत्तर भारत में सावन सोमवार व्रत की तिथियां दक्षिण-पश्चिम भारत से भिन्न होती हैं।
श्रावण मास का धार्मिक महत्व
श्रावण मास को हिंदू धर्म में भगवान शिव का सबसे प्रिय महीना माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान निकले हलाहल विष को भगवान शिव ने इसी मास में कंठ में धारण किया था, जिसके कारण उनका कंठ नीला पड़ गया और उन्हें “नीलकंठ” कहा जाने लगा। विष के प्रभाव को शांत करने के लिए देवताओं ने भगवान शिव पर जल तथा दूध अर्पित किया था, और इसी परंपरा को स्मरण करते हुए आज भी श्रावण मास में शिवलिंग पर जलाभिषेक तथा दुग्धाभिषेक करने की प्रथा है।
यह भी मान्यता है कि श्रावण मास में देवी पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी, जिसके फलस्वरूप भगवान शिव ने उन्हें वरदान देकर पत्नी रूप में स्वीकार किया। इसी कारण श्रावण मास को शिव-शक्ति के मिलन का प्रतीक भी माना जाता है, और विशेष रूप से अविवाहित कन्याएं सुयोग्य वर की प्राप्ति के लिए इस मास में व्रत रखती हैं।
सावन सोमवार व्रत का महत्व
श्रावण मास में पड़ने वाले प्रत्येक सोमवार को “सावन सोमवार” के नाम से जाना जाता है, और इन्हें भगवान शिव की पूजा के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है। उत्तर भारत में इस वर्ष सावन का पहला सोमवार 3 अगस्त, दूसरा 10 अगस्त, तीसरा 17 अगस्त तथा चौथा सोमवार 24 अगस्त 2026 को पड़ेगा। अनेक भक्त पूरे मास के सभी सोमवारों को व्रत रखते हैं, जबकि कुछ श्रद्धालु सोलह सोमवार व्रत का संकल्प लेकर लंबी अवधि तक इस साधना का पालन करते हैं।
सावन सोमवार के दिन भक्त प्रातःकाल स्नान करके शिव मंदिर जाते हैं, जहां शिवलिंग पर जल, दूध, दही, शहद, घी तथा शक्कर से पंचामृत अभिषेक किया जाता है। इसके पश्चात बेलपत्र, धतूरा, भांग तथा सफेद पुष्प अर्पित किए जाते हैं। शिव चालीसा, रुद्राष्टक तथा महामृत्युंजय मंत्र का पाठ करना भी इस दिन विशेष फलदायी माना जाता है।
कावड़ यात्रा और अन्य परंपराएं
श्रावण मास में उत्तर भारत में कावड़ यात्रा की भी विशाल परंपरा है, जिसमें लाखों शिव भक्त (“कांवड़िए”) हरिद्वार, गंगोत्री तथा अन्य पवित्र स्थलों से गंगाजल लेकर पैदल यात्रा करते हुए अपने स्थानीय शिव मंदिरों में जलाभिषेक करने पहुंचते हैं। यह यात्रा भक्ति, संयम तथा शारीरिक तपस्या का अद्भुत संगम मानी जाती है। इसके अतिरिक्त इस मास में हरियाली अमावस्या, नाग पंचमी, मंगला गौरी व्रत तथा श्रावण शिवरात्रि जैसे अनेक महत्वपूर्ण पर्व भी मनाए जाते हैं।
आहार और जीवनशैली के नियम
श्रावण मास में अनेक श्रद्धालु सात्विक भोजन का पालन करते हैं तथा मांस-मदिरा, प्याज-लहसुन तथा तामसिक भोजन से दूर रहते हैं। वर्षा ऋतु में पाचन शक्ति स्वाभाविक रूप से कमजोर हो जाती है, इसलिए हल्का और सुपाच्य भोजन ग्रहण करने की सलाह दी जाती है, जिसका आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से भी विशेष स्वास्थ्य लाभ माना जाता है।
निष्कर्ष
30 जुलाई 2026 से उत्तर भारत में आरंभ होने वाला श्रावण मास भगवान शिव की भक्ति, तपस्या तथा आत्मशुद्धि का सबसे पावन अवसर है। पूर्णिमांत कैलेंडर की इस विशेष परंपरा के अनुसार आरंभ होने वाला यह मास सावन सोमवार व्रत, कावड़ यात्रा तथा अनेक धार्मिक अनुष्ठानों से परिपूर्ण है। श्रद्धापूर्वक इस पावन मास का पालन करने से भक्तों को भगवान शिव की विशेष कृपा, मानसिक शांति तथा जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।



